इंदौर में NEET छात्रा की तीसरी मंजिल से गिरकर मौत, परिजनों ने बताया परीक्षा को लेकर तनाव में थी
19 June 2026 • 06:38 am

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की तीसरी मंजिल से गिरने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना गुरुवार देर रात की बताई जा रही है। गंभीर हालत में छात्रा को पहले निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे एमवाय अस्पताल रेफर किया गया। शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है।
मृतक छात्रा की पहचान अवंतिका मौर्य के रूप में हुई है। वह मूल रूप से धार जिले की रहने वाली थी और इंदौर की धाकड़ कॉलोनी स्थित एक निजी बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर अपनी बड़ी बहन डॉ. सपना मौर्य के साथ रह रही थी। सपना के अनुसार, अवंतिका NEET परीक्षा को लेकर काफी दबाव में थी। वह तीन बार परीक्षा में सफल नहीं हो पाई थी और हाल ही में परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद से मानसिक रूप से परेशान थी।
परिजनों ने बताया कि घटना वाले दिन अवंतिका सामान्य रूप से बातचीत नहीं कर रही थी। वह पूरे दिन चुप-चुप रही और अधिकतर सवालों के जवाब सिर्फ हां या ना में दे रही थी। गुरुवार रात करीब 11:30 बजे वह अपनी बहन नैना से मोबाइल पर बात कर रही थी। इसी दौरान वह सीढ़ियों से ऊपर छत की ओर चली गई और कुछ देर बाद नीचे गिर गई। आवाज सुनकर बिल्डिंग में रहने वाले लोग बाहर आए और तुरंत एम्बुलेंस व पुलिस को सूचना दी गई।
अवंतिका के पिता डॉ. बंशीलाल मौर्य खरगोन जिले के भिकनगांव में मेडिकल अफसर हैं। वे एमवाय अस्पताल में ट्रेनिंग के सिलसिले में पांच दिन पहले इंदौर आए थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि घटना के समय वे फ्लैट के अंदर मौजूद थे, इसलिए अवंतिका किन परिस्थितियों में नीचे गिरी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। घायल हालत में परिजन उसे जूपिटर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे एमवाय अस्पताल भेजा गया। शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे उसकी मौत हो गई।
भंवरकुआं थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। थाना प्रभारी संतोष दूधी के अनुसार, छात्रा के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और घटनास्थल की परिस्थितियों की जांच की जाएगी। एसएफएल टीम ने भी मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह हादसा था या आत्महत्या का मामला।
परिवार से जुड़े चचेरे भाई धन सिंह ने बताया कि गुरुवार को अवंतिका उनके साथ थी। वह बार-बार टिंचा फॉल जाने की जिद कर रही थी, लेकिन वे उसे वहां नहीं ले गए। रात करीब 9 बजे उन्होंने अवंतिका को घर छोड़ा था। उन्होंने यह भी बताया कि जनवरी में अवंतिका ने फिनाइल पीकर आत्महत्या की कोशिश की थी। NEET में सफलता नहीं मिलने के बाद परिजनों ने उसे आगे तैयारी करने से मना कर दिया था और इस वर्ष उसका खरगोन के एक फॉर्मेसी कॉलेज में एडमिशन कराया गया था।
इसी तरह की एक और घटना 6 जून को गुना में सामने आई थी, जहां NEET की तैयारी कर रही 19 वर्षीय युवती रेलवे ओवरब्रिज के पास घायल मिली थी। शुरुआती जांच में युवती के ओवरब्रिज से कूदने की आशंका जताई गई थी, हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है। युवती के पिता पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल हैं और वर्तमान में आरोन में पदस्थ हैं। सिटी कोतवाली थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने बताया था कि युवती बयान देने की स्थिति में नहीं थी, इसलिए पूरी स्थिति उसके होश में आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इससे पहले 20 मई को उमरिया जिले की आकांक्षा चतुर्वेदी ने नागपुर में फांसी लगाकर जान दे दी थी। वह भी NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी। सुसाइड नोट में उसने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा था कि वह दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने बताया था कि उनकी बेटी पढ़ाई में बहुत होशियार थी। परिवार ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उसे पढ़ाई के लिए नागपुर भेजा था। परीक्षा देने के बाद वह खुश थी, लेकिन पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की खबरों के बाद वह मानसिक रूप से टूट गई थी।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के मानसिक तनाव और दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी कर रहे बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, चुप्पी, निराशा या तनाव जैसे संकेतों को परिवार और समाज को गंभीरता से लेना चाहिए।

