Aacharan News
सागर about 1 month ago

डीजल संकट: खेती-किसानी और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ड्रम में डीजल देने की छूट

19 June 2026 08:47 pm

​सागर। सागर जिला प्रशासन ने क्षेत्र के किसानों, स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक परियोजनाओं को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल पंपों से प्लास्टिक के डिब्बों या ड्रमों में डीजल खरीदने पर लगी रोक में ढील दे दी है। नए आदेश के अनुसार, अब किसान, स्वास्थ्य सेवा से जुड़े संस्थान और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के प्रतिनिधि अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए प्रतिदिन एक बार में अधिकतम 200 लीटर तक डीजल प्लास्टिक के कंटेनरों में प्राप्त कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि किसानी के काम में ड्रम में डीजल बेचने की अनुमति देने के संबंध में शुक्रवार को सागर जिला पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एड. राजेंद्र दुबे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर प्रतिभा पाल सिंह से मुलाकात की थी। हालांकि कलेक्टर ने 50 लीटर डीजल के परिवहन की ही अनुमति देने की मंशा जताई लेकिन एसोसिएशन ने उन्हें बताया कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक सुगम दूरी पर पंप नहीं है। इससे किसान व अन्य को समस्या होगी। कलेक्टर ने डीलर्स के तर्क से सहमत होते हुए 200 लीटर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति या संस्था के मान से कंटेनर में डीजल परिवहन की अनुमति दे दी। इस दौरान एसोसिएशन के सदस्य डब्बू मुखारया, संजय अग्रवाल मुख्य रूप से मौजूद थे। इधर कलेक्टर से मुलाकात के बाद अध्यक्ष एड. दुबे ने बताया कि कंटेनर में डीजल खरीदने के लिए किसान या संस्था को निर्धारित पहचान पत्र और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। प्रशासन का यह कदम ऐसे समय में आया है जब कृषि कार्यों और आवश्यक सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए ईंधन की निरंतर आपूर्ति बनाए रखना बेहद जरूरी हो गया है।​इस आदेश के तहत सुरक्षा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। अपर कलेक्टर द्वारा जारी इस निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि दी गई छूट के अनुसार पेट्रोल पंप संचालकों को डीजल की बिक्री का पूरा विवरण एक निर्धारित प्रारूप में दर्ज करना होगा। इसके साथ ही प्रत्येक बिक्री के लिए बिल जारी करना अनिवार्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी पेट्रोल पंप के संचालक की होगी। आदेश का उल्लंघन करने की स्थिति में संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, समस्त तेल कंपनियों के सेल्स ऑफिसर, तहसीलदारों और क्षेत्रीय आपूर्ति अधिकारियों को इस व्यवस्था की सघन मॉनिटरिंग और निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जा सके।

तीन-चार सप्ताह में हालात सामान्य होने की उम्मीद

​वैश्विक स्तर पर चल रहे होर्मूज संकट के कारण देश भर में कच्चे तेल की आवक प्रभावित हुई थी, जिसके चलते राज्य और स्थानीय स्तर पर ईंधन के वितरण को नियंत्रित करना पड़ा था। कूटनीतिक प्रयासों के बाद होर्मूज संकट सुलझने के बाद भी बुंदेलखंड समेत पूरे देश-प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में अभी कम से कम दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है। तेल विपणन कंपनियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के सुचारू होने, रिफाइनरियों से डिपो तक नया स्टॉक पहुंचने और वहां से स्थानीय पेट्रोल पंपों तक ईंधन की डिलीवरी का चक्र पूरा होने में थोड़ा समय लगता है। इसलिए, जब तक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से पटरी पर नहीं लौट आती, तब तक के लिए प्रशासन द्वारा यह अंतरिम राहत व्यवस्था लागू की गई है।

पूर्व में कंटेनर में डीजल बेचने पर लगाई थी रोक

​गौरतलब है कि इससे पूर्व भोपाल संचालनालय द्वारा जारी पत्रों के माध्यम से पेट्रोल पंपों से खुले ड्रमों में डीजल की बिक्री पर रोक लगाई गई थी। इस प्रतिबंध के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को ट्रैक्टरों और कृषि उपकरणों के लिए ईंधन जुटाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। सागर कलेक्टर द्वारा स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लिए गए इस विवेकपूर्ण निर्णय से बुंदेलखंड के इस प्रमुख जिले में कृषि और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। प्रशासन ने आदेश में स्पष्ट किया है कि शेष दिशा-निर्देश यथावत रहेंगे और सभी संबंधित पेट्रोल पंप डीलरों को इन नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।