कांग्रेस एमएलए निर्मला सप्रे के दलबदल मामले पर सुनवाई हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित नेता प्रतिपक्ष ने की सदस्यता रद्द करने की मांग
18 June 2026 • 10:59 pm

जबलपुर - कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के कथित दलबदल मामले में गुरुवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक बार फिर सुनवाई हुई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा दायर याचिका में बीना विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की गई है। फिलहाल हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की बहस पूरी हो गई। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दलबदल मामलों में निर्णय के लिए निर्धारित 90 दिन की समय-सीमा का उल्लेख करते हुए कहा था कि मामले में 720 दिन से अधिक का समय बीत चुका है। इस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया था कि विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) मामले की विधिवत सुनवाई कर रहे हैं और याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच प्रक्रिया जारी है।
कोर्ट में क्या हुआ था पिछली सुनवाई में
मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान विधायक निर्मला सप्रे ने हाईकोर्ट में कहा था कि वह अब भी कांग्रेस की सदस्य हैं। कोर्ट ने उनके इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया था।
साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता उमंग सिंघार को यह साबित करने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा था कि निर्मला सप्रे ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है।
क्या है पूरा मामला
निर्मला सप्रे ने 2023 के विधानसभा चुनाव में सागर जिले की बीना सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान 5 मई को वह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ भाजपा के एक कार्यक्रम में दिखाई दी थीं। इसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं। इसके बाद 5 जुलाई 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दाखिल कर सप्रे की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। याचिका में संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) का हवाला देते हुए कहा गया कि पार्टी बदलने की स्थिति में विधायक की सदस्यता समाप्त की जा सकती है। स्पीकर स्तर पर निर्णय नहीं होने के बाद उमंग सिंघार ने नवंबर 2024 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

