सागर की बेटी खुशबू ने रचा इतिहास: सुप्रीम कोर्ट AOR एसोसिएशन चुनाव में सर्वाधिक वोट पाकर बनीं नंबर-1 एग्जीक्यूटिव मेंबर
23 May 2026 • 09:03 pm

सागर : बुंदेलखंड की माटी और सागर का नाम देश की सर्वोच्च अदालत में एक बार फिर गर्व से ऊंचा हुआ है। सागर से ताल्लुक रखने वाली और पूर्व में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AOR) बनकर परिवार व क्षेत्र का नाम रोशन कर चुकीं एडवोकेट खुशबू साहू सांघी ने 'सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन' (SCAORA) के चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। खुशबू ने न केवल एग्जीक्यूटिव मेंबर (कार्यकारी सदस्य) के पद पर विजय प्राप्त की, बल्कि उन्होंने चुनाव के इतिहास में सबसे अधिक वोट पाने का एक नया कीर्तिमान भी स्थापित कर दिया है।
रिकॉर्ड तोड़ मतों से प्राप्त किया प्रथम स्थान

सुप्रीम कोर्ट एसोसिएशन के इस कड़े मुकाबले में 6 कार्यकारी सदस्य (एग्जीक्यूटिव मेंबर) के स्थानों के लिए मतदान हुआ था। इसमें देश भर के प्रतिष्ठित वकीलों के बीच खुशबू ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाते हुए सूची में पहला स्थान हासिल किया। सर्वोच्च न्यायालय के 700 से अधिक वरिष्ठ और प्रतिष्ठित 'एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड्स' ने खुशबू के पक्ष में अपना मतदान रूपी आशीर्वाद देकर उन्हें इस ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचाया है।
बचपन से ही रहा है 'जीत' से नाता
खुशबू के करीबियों और परिवार का कहना है कि उनकी यह धुरंधर और प्रचंड जीत कोई पहली बार नहीं देखी गई है। खुशबू बचपन से ही नेतृत्व करने और चुनौतियों को मात देने में आगे रही हैं। उनकी स्कूली शिक्षा के दौरान 'वात्सल्य स्कूल' में जब 'ब्लू हाउस' के वाइस कप्तान और फिर कप्तान के चुनाव हुए थे, तब स्कूल में यह धारणा बनी हुई थी कि लड़कियां लड़कों को नहीं हरा सकतीं। उस समय भी खुशबू ने रूढ़ियों को तोड़ते हुए दोनों बार लड़कों को भारी शिकस्त दी थी और विजयश्री प्राप्त की थी।

सफलता के पीछे पूरे परिवार का परिश्रम और अटूट साथ
इस ऐतिहासिक सफलता पर बात करते हुए परिवार ने कहा कि यह केवल खुशबू की अकेली की जीत नहीं है, बल्कि यह उनके पूरे परिवार, शुभचिंतकों और मित्रों के कड़े परिश्रम और त्याग का परिणाम है। खुशबू के हर सपने को सच करने के लिए दृढ़ संकल्पित रहने वाले उनके जीवनसाथी पीयूष सांघी, माता-पिता से बढ़कर लाड-प्यार देने वाले सास-ससुर, हर कदम पर छोटे भाई की तरह साथ खड़े रहने वाले देवर प्रशांत सांघी और हर मुसीबत में ढाल बनने वाले मित्रों और संगी-साथियों के अनथक प्रयासों से ही आज यह इतिहास रचा गया है।
समस्त परिवार ने इस स्नेह और अटूट समर्थन के लिए सभी मतदाता अधिवक्ताओं और शुभचिंतकों का हृदय से आभार व्यक्त किया है और खुशबू को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।
सागर में उनके परिवार में सभी मेधावी
सर्व विदित है कि AOR खुशबू साहू सागर का नामी गिरामी परिवार है, जिसमें उनकी बड़ी बहन IPS विनीता साहू मुंबई में एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस है, दूसरी बड़ी बहन भोपाल में मध्य प्रदेश पुलिस ने TI है। उनका पिता स्व. जयराम साहू एवं भाई धर्मवीर साहू सागर के मशहूर उद्योगपति रहे है। छोटी बहन मंजूषा भी LLB कर चुकी है। उनकी माताजी स्नेहलता साहू ने सभी बच्चों को आगे बढ़ाने में महत्पूर्ण भूमिका निभाई है।
जानिए क्या होता है 'एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड' (AOR)?
सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) की न्याय प्रणाली में 'एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड' (AOR) का पद बेहद गरिमामय और शक्तिशाली होता है। देश के आम नागरिकों और कानूनी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए इसे समझना बेहद जरूरी है:
सर्वोच्च न्यायालय में केस दर्ज करने का विशेष अधिकार: भारत के संविधान और सुप्रीम कोर्ट के नियमों (Order IV of Supreme Court Rules) के तहत, देश की सबसे बड़ी अदालत में किसी भी मुवक्किल (क्लाइंट) की तरफ से केस फाइल (याचिका दर्ज) करने या वकालतनामा पेश करने का अधिकार केवल और केवल एक 'एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड' (AOR) के पास ही होता है। कोई भी अन्य सामान्य वकील, चाहे वह कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो, बिना AOR के माध्यम के सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं कर सकता।
देश की सबसे कठिन कानूनी परीक्षा: एक सामान्य वकील से AOR बनने की राह बेहद कठिन होती है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा हर साल एक बेहद कठिन परीक्षा आयोजित की जाती है।
कड़ी योग्यता की शर्तें: इस परीक्षा में बैठने के लिए किसी भी वकील के पास:
कम से कम 4 साल का वकालत का अनुभव होना अनिवार्य है।
इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट द्वारा मान्यता प्राप्त किसी वरिष्ठ AOR (जिनका अनुभव न्यूनतम 10 वर्ष हो) के अंतर्गत 1 वर्ष की अनिवार्य ट्रेनिंग पूरी करनी होती है।
इन 5 वर्षों की कड़ी तपस्या के बाद ही उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए योग्य माना जाता है।
SCAORA क्या है?
'सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन' (SCAORA) इन्हीं चुनिंदा और शीर्ष वकीलों की मुख्य संस्था है, जो सुप्रीम कोर्ट के भीतर वकीलों के हितों, नियमों और न्याय व्यवस्था की बेहतरी के लिए काम करती है। इसकी कार्यकारिणी (Executive Body) में चुनकर आना पूरे देश के कानूनी गलियारों में एक बहुत बड़ी प्रतिष्ठा माना जाता है।

