गृहणियों के काम की कीमत रुपए 30,000 महीना जितनी: सुप्रीम कोर्ट उन्हें होममेकर नहीं नेशन बिल्डर कहें, वे परिवार की नींव मजबूत करती हैं
11 June 2026 • 09:23 pm

नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला में कहा, 'सड़क हादसे में गृहिणियों की मौत होने पर उनके द्वारा की जाने वाली परिवार की देखभाल और घरेलू काम की कीमत कम से कम ? 30 हजार प्रति महीना (रुपए 3.6 लाख सालाना) मानी जाएगी।
जस्टिस संजय करोल और न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा- यह रकम प्रणय सेठी मामले में तय अन्य सभी मुआवजा नियमों के अलावा होगी। घर संभालने वाली महिलाओं को राष्ट्र निर्माता (नेशन बिल्डर) का दर्जा मिलना चाहिए। उनके काम की तुलना किसी पेशेवर से करके उनके योगदान को कम नहीं आंका जा सकता। दरअसल, कोर्ट का यह फैसला नवंबर 2001 में हरियाणा में सड़क हादसे में हुए गृहणी की मौत के मामले में हुई सुनवाई पर आया। सड़क हादसों के मुआवजा मामलों की सुनवाई करने वाले मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) में अक्सर गृहिणियों के योगदान का मूल्यांकन करना चुनौती होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दी है।

