डॉक्टर की लापरवाही से कटी नस, उपभोक्ता फोरम में शिकायत
4 June 2026 • 06:35 am
सागर। एक डेंटिस्ट की कथित अनदेखी और गलत इलाज के कारण महिला मरीज को असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ा। चिकित्सक की लापरवाही का आलम यह रहा कि रूट कैनाल ट्रीटमेंट के दौरान मरीज के दांत की नस ही कट गई, जिससे उनके चेहरे का एक हिस्सा सुन्न हो गया और उनका खाना-पीना तक पूरी तरह बंद हो गया। पीड़ित महिला ने अब न्याय की गुहार लगाते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, सागर में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। जानकारी के अनुसार शहर के मधुकरशाह वार्ड की निवासी रितु श्रीवास्तव (46 वर्ष) पति दीपक गोस्वामी ने परकोटा स्थित 'प्रो. डेंटल केयर लेजर इम्प्लांट एण्ड रूट कैनाल सेन्टर' के संचालक डॉ. देवेन्द्र ओझा के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत परिवाद दायर किया है। श्रीवास्तव के अनुसार, मुझे दाढ़ में दर्द और सूजन की शिकायत थी, जिसके इलाज के लिए मैं 1 अगस्त 2025 को डॉ. ओझा के क्लिनिक पहुंचीं। डॉक्टर ने शुरुआती जांच के बाद दाढ़ क्रैक होने की बात कही और रूट कैनाल कराने की सलाह दी। इसके एवज में डॉक्टर ने मुझसे 7 हजार रु. फीस भी जमा करा ली। लेकिन राहत मिलने के बजाय मेरी मुश्किलें शुरू हो गईं।
इलाज अधूरा छोड़कर मरीज को अपने हाल पर छोड़ा
परिवादी महिला का आरोप है कि कई बार क्लिनिक बुलाकर आरसीटी की प्रक्रिया और सफाई की गई, लेकिन महिला का दर्द लगातार बढ़ता गया। हद तो तब हो गई जब अत्यधिक दर्द से तड़प रही मरीज को राहत देने के बजाय डॉक्टर ने हाथ खड़े कर दिए। शिकायत के अनुसार, जब पीड़िता दर्द से बेहद परेशान हो गई, तो डॉक्टर ने आगे इलाज करने से साफ मना कर दिया। उन्होंने मरीज की दाढ़ का जो मुंह खोला था, उसे वैसा ही खुला छोड़ दिया। इस अनदेखी के कारण महिला को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ी और वह केवल तरल पदार्थों पर निर्भर रहने को मजबूर हो गईं।
दूसरे डॉक्टर ने बताई इलाज की खामी
जब डॉ. ओझा की कथित लापरवाही के कारण पीड़िता की हालत बिगड़ने लगी, तो उन्होंने हारकर दूसरे चिकित्सक डॉ. सतीश भाटी को दिखाया। जांच के बाद जो सच सामने आया, वह बेहद चौंकाने वाला था। डॉ. भाटी ने बताया कि पिछले गलत इलाज और आरसीटी प्रक्रिया के दौरान लापरवाही के कारण उनके दांत की एक मुख्य नस कट गई है, जिसकी वजह से पूरे हिस्से में सुन्नपन और अत्यधिक दर्द बना हुआ है। डॉक्टर की इस घोर लापरवाही के चलते महिला के दांतों में सड़न और गंभीर संक्रमण फैल गया । वर्तमान में भी पीड़िता का इलाज चल रहा है और वह अब तक ₹1,00,000 से अधिक की राशि खर्च कर चुकी हैं।
पीड़िता ने मांगा 11 लाख रु. का मुआवजा
पीड़िता द्वारा विपक्षी डॉक्टर को कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला, तो पीड़िता ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपने वकील पंकज श्रीवास्तव के माध्यम से डॉक्टर ओझा पर व्यावसायिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए कुल 11.10 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है। इसमें इलाज का खर्च, शारीरिक और मानसिक यातना का हर्जाना तथा अदालती खर्च शामिल है।

