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दमोह 1 day ago Breaking

आरओ बैठक में राजस्व अमले की खुली पोल; बिना नाम, तारीख और हस्ताक्षर के मिले सैकड़ों आदेश

दिनेश चौबे दमोह

11 June 2026 08:48 pm

दमोह- राजस्व के लंबित मामलों को लेकर दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की, जिसमें काम में घोर लापरवाही बरतने वाले तहसीलदारों, आरआई और पटवारियों को सख्त हिदायत दी गई। आरसीएमएस (RCMS) पोर्टल के रैंडम सत्यापन के दौरान कलेक्टर ने पाया कि 90% से अधिक मामलों में आदेश त्रुटिपूर्ण और विसंगतिपूर्ण हैं।

आदेशों में मिलीं गंभीर कमियां:

ब्लैंक और अधूरे आदेश: कई आदेश पूरी तरह से खाली थे, जिन पर नीचे हस्ताक्षर तो थे लेकिन ऊपर आवेदक का नाम, केस नंबर, गाँव का नाम या खसरा नंबर गायब था।

हस्ताक्षर विहीन फाइलें: कुछ आदेशों में ऊपर तो सब लिखा था, लेकिन नीचे तहसीलदार के हस्ताक्षर और शासकीय मुद्रा (सील) ही नहीं थी।

अस्पष्टता: कई आदेश इतने धुंधले अपलोड किए गए थे कि स्वयं तहसीलदार भी उन्हें पढ़ने में असमर्थ रहे।

लेटलतीफी: आदेश होने के चार-चार महीने बाद उन्हें पोर्टल पर अपलोड किया गया।

रोवर मशीन का दुरुपयोग और 'पहले आओ पहले पाओ' नियम:

कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि शासन द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से दी गई रोवर मशीन—जिसकी क्षमता प्रतिदिन कम से कम 3 से 4 सीमांकन करने की है—उसका सालभर में केवल 7 बार उपयोग किया गया। कर्मचारियों ने बैटरी न होने जैसे बहाने बनाए, जबकि दूसरी मशीनें पूरी तरह तैयार रखी थीं।

इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:

अब 'पहले आओ पहले पाओ' की तर्ज पर पुराने आवेदनों का सीमांकन पहले किया जाएगा।

रोवर मशीन के लिए एक साप्ताहिक रोस्टर प्लान तैयार किया जाएगा।

आदेश स्पष्ट और गुणवत्तापूर्ण (स्पीकिंग ऑर्डर) होने चाहिए ताकि किसान उसे समझ सकें।

एक सप्ताह का अल्टीमेटम:

कलेक्टर ने बताया कि व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां होने के कारण फिलहाल सभी कर्मचारियों को अपनी गलती सुधारने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। इसके बाद यदि सुधार नहीं पाया गया, तो सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, एसडीएम और तहसीलदारों को फील्ड विजिट करने और आंगनबाड़ी, स्कूलों व छात्रावासों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।