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दमोह 14 days ago Breaking

दो अफगानी घुसपैठिये दमोह से करवा चुके ई-आधार वेरिफाई

दिनेश चौबे - दमोह

30 May 2026 06:13 am

दमोह - फर्जी आधार कार्ड बनाने का देश की सुरक्षा को कितना बड़ा नुकसान है।इसका एक नमूना बीते 3 माह पहले सामने आ चुका है। जिसमें फरवरी में पकड़े गए जबलपुर में पांच अफगानी घुसपैठियों के फर्जी पासपोर्ट में से दो के वेरिफिकेशन दमोह डाकघर से हुए थे। जिसमें वे अपने फर्जी आधार कार्ड लेकर पहुंचे थे और ई आधार वेरिफिकेशन दमोह डाकघर से संपन्न करवा चुके थे। इसमें वेरिफिकेशन करवाने वाला व्यक्ति तो फर्जी था लेकिन उसका आधार कार्ड असली होने के कारण पासपोर्ट विभाग दमोह का कर्मचारी भी गच्चा खा गया। दरअसल अफगानिस्तान का रहने वाला सोहबत खान काबुल से होता हुआ 2015 पश्चिम बंगाल बॉर्डर से भारत में दाखिल हुआ था। जो भोपाल होता हुआ जबलपुर में अवैध रूप से रहने लगा था और यही इसने अपने फर्जी दस्तावेज तैयार किये और ऐसे ही लालची भ्रष्ट लोगों के माध्यम से उसने पांच और अफगानी नागरिकों जिया उल रहमान,सुल्तान मोहम्मद, रजा खान, जफर व सैयद मोहम्मद को भारत में प्रवेश करवा लिया और उनके दस्तावेज तैयार करवा दिए थे। इन सब के दस्तावेजों की शुरुआत आधार कार्ड बनने से ही हुई थी।

ऐसी घटनाओं के बाद जाँच में गंभीर नहीं प्रशासन

बीते 13 माह से आधार कार्ड फर्जीवाडा मामले में पुलिस के द्वारा ढीला शाही बरती जा रही है। वहीं पुलिस जांच अटकने का कारण भी जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा सही जानकारी न देकर गुमराह करना सामने आया है। जबकि इतने लंबे समय तक इतने सारे जिलों में दमोह की दो आईडी से आधार कार्ड बना देश की सुरक्षा में खतरे क़ा साबसे बड़ा अलार्म है। उसके बाद भी निचले स्तर पर भ्रष्टाचार की आड़ में देशद्रोह जैसा अपराध करने वाले आरोपी निश्चिंत घूम रहे हैँ।

(अलग बॉक्स में रखें )

क्या था मामला

बीते साल कलेक्टर को दमोह की आधार आईडी देश सीमावर्ती राज्यों में चलने की गोपनीय शिकायत प्राप्त हुईं थी। उसके बाद भोपाल व दिल्ली से दो मशीनों क़ा डेटा मंगाया गया था। जिसमें आइडी क्रमांक 29832 देश के आधा दर्जन राज्यों में संचालित होने के प्रमाण मिले थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार आधार मशीन स्टेशन आइडी 29026 ऑपरेटर आइडी एमपी 0515डी डीएम एनएस 383239 व आइडी 29832 ऑपरेटर आइडी एमपी 0515 डी डीएम डीएम एनएस एनए 706551 दमोह में काम करने के लिए स्वीकृत की 29832 के रिकॉर्ड के अनुसार मप्र के सागर, पन्ना, छिंदवाड़ा, सतना, छतरपुर, सीधी, शहडोल, जबलपुर, कटनी जिलों में चलाई गई थी।

इसके अलावा..

👉 पश्चिम बंगाल के जिला मालदा, कलियाचक, जिला कूच बिहार, दिनाजपुर उत्तर, पश्चिम मेदिनापुर,दार्जिलिंग, पुरुलिया, बनाकुरा, झारग्राम

👉बिहार प्रदेश के जिला माधेपुरा,सहरसा कटिहार, खगरिया, पुरुनिया, अररिया, किशनगंज

👉दिल्ली एनसीआर के दक्षिण पश्चिम दिल्ली

👉राजस्थान के बीकानेर,

👉हरियाणा के पानीपत,

👉झारखंड प्रदेश के जिला पूर्व सिंहभूम जिलों में संचालित होती मिली थी।

(बॉक्स क्लोज)

जाँच में सही पाते हुए कलेक्टर ने एसपी को जाँच कर एफआईआर दर्ज करने पत्र लिखा था। जिसमें पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ कलेक्टर के प्रतिवेदन और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस ने धारा 318 (4) बीएनएस, 66 (सी) एवं 66 (डी) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था।

पर 13 माह बीत जाने के बाद भी मामला अज्ञात है।