Aacharan News
छतरपुर 4 days ago

आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा

9 June 2026 11:48 am

छतरपुर - प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। आशा एकता संघ मध्य प्रदेश के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों और काटी गई प्रोत्साहन राशि को पुन: बहाल करने के संबंध में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक के नाम कलेक्टर कार्यालय में तहसीलदार दुर्गेश तिवारी को एक ज्ञापन सौंपा है। संघ की प्रदेश अध्यक्ष हीरा देवी सिंह चंदेल के नेतृत्व में सौंपे गए इस मांग पत्र में साफ कहा गया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगी। शिकायत पत्र में बताया गया है कि आशा कार्यकर्ताओं को प्रतिमाह 6,000 रुपये का फिक्स मानदेय मिलता है, जिसके अतिरिक्त मार्च 2026 तक सरकार द्वारा विभिन्न 64 प्रकार के स्वास्थ्य कार्यों के बदले प्रोत्साहन राशि दी जाती थी। परंतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल द्वारा अचानक अप्रैल 2026 से कुछ महत्वपूर्ण कार्यों की प्रोत्साहन राशि बंद कर दी गई है। बंद की गई राशि में गर्भवती महिलाओं के शीघ्र पंजीकरण पर मिलने वाले 200 रुपये, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर शाला त्यागी बच्चों को मोबिलाइजर करने के 100 रुपये और कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराने के बाद फॉलोअप के लिए मिलने वाले 900 रुपये शामिल हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे और उनके परिवार इसी प्रोत्साहन राशि के भरोसे जीवन यापन करते हैं, जिसे बंद करना उनके साथ सरासर अन्याय है। संगठन ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 29 जुलाई 2023 को की गई उस घोषणा की ओर भी ध्यान आकर्षित कराया, जिसमें प्रत्येक वर्ष मानदेय में 1000 रुपये की बढ़ोतरी की बात कही गई थी, जो आज दिनांक तक शुरू नहीं हो सकी है, जबकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को यह लाभ निरंतर दिया जा रहा है। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि सरकार द्वारा उनके बजट मद को पूरी तरह स्पष्ट किया जाए और वरिष्ठ अधिकारियों को दिए जाने वाले भुगतान पत्रक की पावती उन्हें अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। प्रशासनिक पारदर्शिता की मांग करते हुए संघ ने कहा कि जब तक मासिक मानदेय पूरी तरह निश्चित नहीं हो जाता, तब तक हर महीने का भुगतान किस्तों में करने के बजाय एक बार में ही किया जाए, ताकि भुगतान पत्रक में स्पष्टता बनी रहे। साथ ही भुगतान होते ही मोबाइल पर मैसेज भेजने की व्यवस्था भी शुरू की जाए। कार्यकर्ताओं ने विभाग द्वारा दी जाने वाली सेवा समाप्ति नोटिस की प्रथा पर तुरंत पाबंदी लगाने और डिजिटल कार्यों के संचालन के लिए सरकार की तरफ से मोबाइल खरीदने हेतु राशि उपलब्ध कराने की पुरजोर वकालत की है। अपनी अन्य जायज मांगों को दोहराते हुए आशा कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि उन्हें मातृत्व अवकाश के दौरान भी पूरा वेतन यथावत दी जाए। इसके अलावा अन्य विभागों के कार्यों में आशा कार्यकर्ताओं की ड्यूटी न लगाई जाए और यदि किसी आपात स्थिति में ड्यूटी लगती भी है, तो उसका अलग से पारिश्रमिक दिया जाए। कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ममत्व शिविर के माध्यम से वे चार-चार एएनसी जांच करवाकर गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाती हैं, लेकिन यदि डिलीवरी किसी दूसरे जिले या प्राइवेट अस्पताल में रिफर हो जाती है, तो उन्हें जांच का पैसा भी नहीं दिया जाता।