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कॉमर्शियल नीले सिलेंडर के दाम फिर बढ़े - खान-पान समेत अन्य कारोबारी परेशान, चूल्हों की लौ पड़ी धीमी

3 June 2026 03:19 pm

सागर। कॉमर्शियल सिलेंडर के दामों में हुई हालिया वृद्धि के चलते होटलों और ढाबों के चूल्हे की लौ अब धीरे-धीरे धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। मई के महीने में ही कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में 983 रुपये की बढ़ोत्तरी की गई थी, जिससे सागर जिले के समस्त व्यापारी और उपभोक्ता अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि एक जून से उन पर 43 रुपये 50 पैसे की एक और अतिरिक्त भार डाल दिया गया। इस नई मूल्य वृद्धि के बाद सागर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों की कमर टूट गई है। मई महीने से पहले जिस कॉमर्शियल सिलेंडर की मूल कीमत 2 हजार 364 रुपये हुआ करती थी, वह मई की बढ़ोतरी के बाद बढ़कर 3 हजार 347 रुपये तक पहुँच गई थी, और अब सोमवार से प्रभावी हुई नई दरों के बाद इसकी कीमत बढ़कर 3 हजार 388 रुपये के पार हो चुकी है। दो महीने के भीतर उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर 1026 रुपये 50 पैसे का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है।

इधरकमर्शियल सिलेंडर के दामों में हुई इस बेतहाशा वृद्धि के चलते होटलों और ढाबों के चूल्हे की लौ अब धीरे-धीरे धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। सागर जिले में पंजीकृत विभिन्न कंपनियों के लगभग 2000 कमर्शियल सिलेंडर उपभोक्ता हैं। यदि एक वाणिज्यिक सिलेंडर की महीने में औसतन चार बार रीफिलिंग मानी जाए, तो दो महीने के भीतर ही जिले के व्यापारिक वर्ग पर लगभग 80 लाख 50 हजार रुपये का भारी-भरकम और अतिरिक्त आर्थिक फटका लगा है। इसके कारण बाजार में नकदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है और व्यापारियों का मुनाफा पूरी तरह समाप्त हो गया है।

छोटे दुकानदार सबसे ज्यादा परेशान

कमरतोड़ महंगाई के कारण सागर जिले में खान-पान, होटल, रेस्तरां और कैटरिंग समेत अन्य छोटे-बड़े व्यापारिक कारोबारों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। चाय-नाश्ते के ठेलों से लेकर बड़े होटलों तक में खाद्य सामग्रियों के दाम आसमान मनमाने ढंग से बढ़ गए हैं। हालांकि इसका असर ग्राहकी पर भी हुआ है। कई छोटे दुकानदार महंगी खाद्य सामग्री नहीं बेच पाने कारण अपने ठेले- टपरे बंद करने पड़े हैं। इधर जिले में एक तरफ जहाँ कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतें आसमान छू रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ प्रमुख फ्यूल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की किल्लत की स्थिति भी निर्मित हो रही है, जिससे माल ढुलाई और परिवहन लागत में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इस दोहरी मार का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। सागर के मुख्य बाजारों जैसे तीन बत्ती, कटरा बाजार और सिविल लाइंस के होटल संचालकों का कहना है कि सिलेंडर महंगे होने से अब चाय, समोसा, रोटी, दाल और सब्जियों के दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गई है। बाजार में अब यह स्थिति बन चुकी है कि आम जनता के लिए बाहर खाना-पीना बेहद महंगा हो गया है, जिसके चलते कई छोटे होटल और ठेला संचालकों ने लागत बचाने के लिए एलपीजी को छोड़कर एक बार फिर कोयले और लकड़ी की भट्टियों का रुख करना शुरू कर दिया है। लेकिन यह उपाय भी श्रम, ढुलाई के लिहाज से महंगा सौदा साबित हो रहा है।