मिट्टी मिले गेहूं के भंडारण के खेल में सब 'सेट'! शिकायत के बाद भी अफसर मौन
8 June 2026 • 02:55 am

सागर। गंभीरिया के लक्ष्मी नगर स्थित श्री देव प्रभा वेयर हाउस में गेहूं के नाम पर मिट्टी से भरी बोरियां पहुंचाने का एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले में प्रशासन ने आरोपी स्वसहायता समूह के खिलाफ अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है। अधिकारियों का तर्क है कि समूह को बोरियां वापस कर अच्छी क्वालिटी का गेहूं लाने को कहा गया है। लेकिन इस पूरे मामले ने प्रशासनिक मुस्तैदी और ईमानदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
6 दिन पहले ही मिल चुकी थी लिखित शिकायत, पर सोते रहे अफसर
यह कोई अचानक हुआ मामला नहीं है। श्री देव प्रभा वेयर हाउस के संचालक आरपी सुहाने ने 1 जून 2026 को ही एमपी डब्ल्यू एससी सांईखेड़ा के शाखा प्रबंधक को लिखित पत्र भेजकर आगाह किया था। पत्र में स्पष्ट लिखा था कि वेयर हाउस में आने वाली गेहूं की बोरियां फटी हुई हैं और उनमें गेहूं की जगह पालायुक्त (मिट्टी) अनाज भरा प्रतीत हो रहा है। उन्होंने अफसरों से मौके पर मुआयना करने का आग्रह भी किया था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई सुध नहीं ली। शनिवार को जब पानी सिर से ऊपर चला गया और सीधे मिट्टी से भरी बोरियां वेयर हाउस पहुंचने लगीं, तब वेयर हाउस के कर्मचारियों ने इसका वीडियो बनाना शुरू किया। वीडियो बनता देख मौके पर मौजूद सुपरवाइजर हरकत में आए और जांच के बाद बोरियों को वापस लौटाया गया।
बड़ा सवाल: पहले जमा हो चुकीं 800 बोरियों की जांच क्यों नहीं?
प्रशासन की ढिलाई इस बात से भी साफ झलकती है कि इस गड़बड़ी के पकड़े जाने से पहले शनिवार तक उक्त समूह द्वारा करीब 800 बोरियां वेयर हाउस में जमा कराई जा चुकी हैं। अमानक और मिट्टी मिली बोरियां पकड़े जाने के बाद भी, पहले से जमा हो चुकीं इन 800 बोरियों की दोबारा जांच करने की जहमत किसी भी अधिकारी ने नहीं उठाई है।
"थोड़ी देर की परेशानी थी, अब सब सेट है"- संचालक
कागजों में 'हर्षिका स्वसहायता समूह' की अध्यक्ष भले ही बवीता सेन हैं, लेकिन खैजरा गांव स्थित उपार्जन केंद्र पर पूरा कामकाज उनके पति दीपक सेन ही संभालते हैं। जब इस मिट्टीयुक्त अनाज को लेकर उपार्जन केंद्र पर दीपक सेन से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने बेखौफ अंदाज में भ्रष्टाचार की पोल खोल दी। दीपक सेन का कहना था:
"मजदूरों ने जमीन पर गिरा गेहूं बिना छाने ही बोरियों में भर दिया था। उपार्जन के समय कई क्विंटल गेहूं नीचे गिर जाता है, उसे ऐसे ही छोड़ देंगे तो लाखों का नुकसान कौन सहेगा? वीडियो सामने आने के कारण अफसरों ने पूछताछ के लिए बुलाया तो था, लेकिन थोड़ी देर की परेशानी और थोड़े लेन-देन के बाद अब सब 'सेट' हो गया है। यह मेरा पहला साल है, अगली बार से ध्यान रखूंगा।"
समूह संचालक का यह कबूलनामा साफ तौर पर दर्शाता है कि नीचे से लेकर ऊपर तक इस गड़बड़ी को दबाने के लिए कथित तौर पर 'लेन-देन' का खेल हो चुका है, यही वजह है कि इतनी बड़ी धोखाधड़ी के बाद भी स्वसहायता समूह पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

