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मध्यप्रदेश • 2 days ago Breaking

विदिसा में आरक्षण-UGC नियमों के खिलाफ उग्र प्रदर्शन: पुलिस से झूमा-झटकी और वाटर कैनन का इस्तेमाल; SC-ST एक्ट में बदलाव व स्वर्ण आयोग के गठन की मांग

24 October 2026 • 10:56 am

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में शनिवार को सर्व समाज एकता मंच के आह्वान पर आरक्षण व्यवस्था, यूजीसी (UGC) के नए नियमों और एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट में संशोधन की प्रमुख मांगों को लेकर शहर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के उग्र रुख को देखते हुए पीतल मिल, रामलीला क्षेत्र और मुख्य बाजार पूरी तरह से बंद रहे। प्रदर्शनकारियों ने एक विशाल रैली निकालकर कलेक्ट्रेट की तरफ कूच किया, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झूमा-झटकी देखने को मिली। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का भी इस्तेमाल करना पड़ा।

कलेक्ट्रेट पहुंचने के रास्ते में पुलिस ने की थी बैरिकेडिंग

प्रदर्शनकारियों को कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने से रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा तिलक चौक, देवी के बाग और स्वामी विवेकानंद चौराहे पर कड़े सुरक्षा प्रबंध करते हुए भारी बैरिकेडिंग की गई थी। जैसे ही रैली इन स्थानों पर पहुंची, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारियों की भीड़ बैरिकेड्स पर चढ़ गई और पुलिस के साथ उनकी जमकर झूमा-झटकी हुई। हालात की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस ने वाटर कैनन (पानी की बौछार) का उपयोग किया, लेकिन इसके बावजूद आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पार कर लिए और अंततः कलेक्ट्रेट पहुंचकर ही दम लिया।

ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और स्वर्ण आयोग के गठन की मांग

कलेक्ट्रेट पहुंचे सर्व समाज एकता मंच के प्रतिनिधियों ने महामहिम राष्ट्रपति और देश के प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें उठाई गईं:

  • आर्थिक आधार पर आरक्षण: प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ जाति के आधार पर मिलने के बजाय पूरी तरह से आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचना चाहिए, ताकि एक ही परिवार को बार-बार लाभ मिलने के बजाय अन्य जरूरतमंदों को भी अवसर मिल सके।

  • SC-ST एक्ट में संशोधन: कानून के कथित दुरुपयोग को रोकने और निर्दोष लोगों को अनावश्यक कानूनी उत्पीड़न से बचाने के लिए एससी-एसटी एक्ट में आवश्यक संशोधन किए जाने की पुरजोर मांग की गई।

  • सवर्ण आयोग का गठन: सामान्य और सवर्ण वर्ग के हितों की रक्षा तथा उनके विकास के लिए एक स्वतंत्र 'सवर्ण आयोग' के गठन की मांग उठाई गई।

  • UGC के नए नियम वापस लें: उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े यूजीसी के नए विवादित नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की गई, ताकि सभी वर्गों के छात्रों के लिए समानता बनी रहे।

शशांक भार्गव और पर्वेंद्र शर्मा ने उठाए तीखे सवाल

प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेता शशांक भार्गव ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार चाहे किसी भी दल की हो, यदि कोई भी नीति आम जनता और समाज के हित में नहीं है, तो उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून बनाते समय सामाजिक समरसता का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है। वहीं, सपाक्स के जिला सचिव पर्वेंद्र शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप देकर पूरे देश में आगे बढ़ाया जाएगा।

प्रशासन की पैनी नजर

इस पूरे विरोध प्रदर्शन और बंद के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। फिलहाल प्रदर्शनकारियों द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन सौंप दिए जाने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है, लेकिन विभिन्न सामाजिक संगठनों की इन तीखी मांगों के चलते राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।