हाइवे पर वाहन की टक्कर से तेंदुए की मौत: एक साल में 5 तेंदुओं ने गंवाई जान, वन विभाग ने सैंपल जांच के लिए जबलपुर भेजे
26 October 2026 • 06:09 am

मध्य प्रदेश के सागर जिले के मालथौन वन परिक्षेत्र से वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक और दुखद खबर सामने आई है। रविवार को नेशनल हाइवे के पास इटवा और बरोदिया के बीच सड़क से करीब 10 मीटर की दूरी पर एक तेंदुआ मृत अवस्था में बरामद हुआ। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और प्रारंभिक कार्रवाई पूरी करने के बाद तेंदुए के शव को पोस्टमार्टम के लिए सागर भिजवा दिया। वन विभाग ने प्रथम दृष्ट्या इस हादसे की वजह तेज रफ्तार वाहन की टक्कर को माना है, हालांकि मौत के पुख्ता कारणों का खुलासा करने के लिए तेंदुए के विसरा और अन्य सैंपल जांच हेतु जबलपुर स्थित प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं।
सड़क से 10 मीटर दूर तक घिसटा तेंदुआ, पिछले एक साल में 5वीं घटना
एसडीओ आईएएस जय प्रकाश ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच के मुताबिक, हाइवे पार करते समय किसी अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने तेंदुए को जोरदार टक्कर मार दी होगी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तेंदुआ सड़क से करीब 10 मीटर दूर तक घिसटता चला गया, और उसके पिछले धड़ में गंभीर चोटें आईं। इन्हीं अंदरूनी और बाहरी गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत होने की प्रबल आशंका जताई जा रही है। वन अधिकारियों ने शिकार या किसी अन्य आपराधिक गतिविधि की आशंका से पूरी तरह इंकार किया है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी नीतेश सोनी ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पिछले एक साल के भीतर मालथौन और आसपास के क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं के कारण कुल 5 तेंदुओं की मौत हो चुकी है। इनमें से 3 घटनाएं उनके अपने कार्यक्षेत्र में और 2 घटनाएं उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इलाकों में घटी हैं। लगातार हो रही इन दर्दनाक घटनाओं के कारण क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
एनएचआई को पत्र लिखने के बाद भी नहीं उठाए गए प्रभावी कदम
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाइवे पर बेलगाम दौड़ने वाले वाहनों की रफ्तार को नियंत्रित करने और वन्यजीवों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को पहले भी पत्र लिखा जा चुका है। इसके बावजूद हाइवे पर चेतावनी संकेतकों (Signboards) लगाने, स्पीड ब्रेकर बनाने या वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। लगातार बढ़ती इन दुर्घटनाओं से यह साफ जाहिर होता है कि वन क्षेत्र से गुजरने वाले व्यस्त मार्गों पर वन्यजीवों की सुरक्षा पूरी तरह से रामभरोसे चल रही है। फिलहाल, वन विभाग की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे मामले में आगे की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

