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पन्ना• 2 days ago Breaking

पन्ना में विकास परियोजनाओं के खिलाफ उमड़ा जनसैलाब: 2000 से अधिक ग्रामीणों और आदिवासियों ने किया प्रदर्शन, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सौंपा ज्ञापन

24 October 2026 • 03:28 pm

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में विभिन्न बड़ी विकास परियोजनाओं के कारण विस्थापन और समस्याओं का सामना कर रहे किसानों, आदिवासियों तथा स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश शनिवार को सड़क पर खुलकर सामने आया। 'जय किसान संगठन' और 'प्रभावित किसान-आदिवासी समुदाय' के आह्वान पर पन्ना में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जिसमें 2000 से अधिक लोग शामिल हुए। इस प्रदर्शन का नेतृत्व मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने किया। हाथों में बैनर-तख्तियां थामे हजारों की संख्या में प्रभावित लोग छतरसाल पार्क से कलेक्ट्रेट तक पहुंचे और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

राज्यपाल के नाम अपर कलेक्टर को सौंपा गया विस्तृत ज्ञापन

रैली के कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रभावित ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन अपर कलेक्टर एम.आर. धुर्वे को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि विकास परियोजनाओं के नाम पर जिन किसानों और आदिवासियों की जमीनें ली जा रही हैं, उन्हें नियमानुसार पूरा और उचित मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा, बिना पुनर्वास की उचित व्यवस्था किए उनके घरों को तोड़ने या जमीनों पर जबरन कब्जा करने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।

चिंता सत्याग्रह और पुलिस कार्रवाई की उच्चस्तरीय जांच की मांग

ज्ञापन में यह भी प्रमुखता से उठाया गया कि पिछले 28 दिनों से अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल और 'चिंता सत्याग्रह' कर रहे आंदोलनकारियों और प्रभावितों पर दर्ज किए गए मुकदमों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही, सत्याग्रह के दौरान पुलिस द्वारा बरती गई सख्ती और महिलाओं के साथ कथित अभद्रता के पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की गई।

उमंग सिंघार का सरकार पर तीखा हमला, 28 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं लोग

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस दौरान प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार विकास के नाम पर गरीबों और आदिवासियों के अधिकारों का हनन कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पूर्व में विधानसभा में इस पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि आज भी लोग अपनी मांगों को लेकर पिछले 28 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि कई मामलों में अपात्र लोगों को मुआवजा दे दिया गया है, जबकि वास्तविक और पात्र परिवार आज भी मुआवजे और सहायता से वंचित छूट गए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते प्रभावितों की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो इस संघर्ष को और अधिक तीव्र किया जाएगा।