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मध्यप्रदेश • 3 days ago Breaking

जबलपुर की ऐतिहासिक बैलेन्सिंग रॉक पर खतरा: 2000 साल पुरानी प्राकृतिक धरोहर के पास हो रहा बहुमंजिला निर्माण, सरकारी जमीन पर कब्जे से मचा हड़कंप

23 October 2026 • 10:51 am

मध्य प्रदेश के संस्कारधानी जबलपुर की विश्व प्रसिद्ध और अनूठी प्राकृतिक धरोहर 'बैलेन्सिंग रॉक' पर इन दिनों अस्तित्व का बड़ा संकट मंडराने लगा है। मदन महल की पहाड़ियों पर स्थित इस दो हजार साल पुरानी चमत्कारी चट्टान के बेहद करीब धड़ल्ले से बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे इसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया है कि जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते ऐतिहासिक धरोहर के आसपास की सरकारी जमीन पर तेजी से कब्जे हो रहे हैं और बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य जारी हैं।

1935 और 1997 के भूकंप भी नहीं डिगा पाए थे इस चट्टान को

जबलपुर की पहचान बन चुकी यह बैलेन्सिंग रॉक अपनी अद्भुत बनावट के लिए देश-विदेश में जानी जाती है। एक विशाल गोलाकार चट्टान दूसरी चट्टान के ऊपर इस प्रकार संतुलित है कि देखने वाले अश्चर्य में पड़ जाते हैं। इतिहास और भूवैज्ञानिकों के अनुसार, यह संरचना वर्षों पुराने प्राकृतिक कटाव का परिणाम है। इस चट्टान की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 1935 के भूकंप से लेकर 1997 में आए 6.5 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के झटकों के बावजूद यह अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। लेकिन अब इसके ठीक पीछे महज 20 फीट की दूरी पर हो रहे निर्माण कार्यों और भारी मशीनों की आवाजाही से इस पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

30 एकड़ सरकारी जमीन सिकुड़कर 0.8 हेक्टेयर बची

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि वर्ष 1910 के राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार खसरा नंबर 194 की करीब 30 एकड़ जमीन पूरी तरह से सरकारी दर्ज थी। लेकिन समय के साथ राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के कारण धीरे-धीरे इस पर अवैध कब्जे बढ़ते गए और जमीन निजी स्वामित्त्व में दर्ज होती चली गई। अब स्थिति यह है कि बैलेन्सिंग रॉक के आसपास बमुश्किल 0.8 हेक्टेयर सरकारी जमीन ही शेष बची है, और बाकी हिस्से पर धड़ल्ले से कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं।

जिम्मेदार विभागों में एक-दूसरे पर टालमटोल का खेल

इस पूरे मामले में सबसे हैरानी की बात यह है कि जब मीडिया और सामाजिक संगठनों ने प्रशासनिक विभागों से सवाल किए, तो अधिकारियों के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। पर्यटन विभाग इस धरोहर की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की बता रहा है, जबकि पुरातत्व विभाग का कहना है कि बैलेन्सिंग रॉक उनके प्रशासनिक अधीन नहीं आती है। वहीं, नगर निगम के भवन अधिकारियों का दावा है कि उन्हें इस क्षेत्र में हो रहे किसी भी नए निर्माण की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। विभागों की इस आपसी खींचतान और उदासीनता के कारण भू-माफियाओं और अवैध निर्माण करने वालों के हौसला बुलंद हैं।

विशेषज्ञों ने जताई भारी चिंता, तत्काल रोक लगाने की मांग

आर्कियोलॉजिकल और भूवैज्ञानिक विशेषज्ञों का मानना है कि बैलेन्सिंग रॉक के इतने करीब भारी मशीनों के इस्तेमाल से जो कंपन पैदा होगा, वह इस नाजुक और संतुलित प्राकृतिक संरचना को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, आसपास पानी की उचित निकासी न होने और बारिश का पानी जमा होने से चट्टान के बेस की मिट्टी कमजोर हो सकती है। विशेषज्ञों और नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से इस क्षेत्र के राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराई जाए, अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया जाए और इस अमूल्य प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि हमारी यह ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रह सके।