एमपी में नए डीजीपी की रेस तेज: 1991 बैच के तीन वरिष्ठ अधिकारी सबसे आगे; प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के पास प्रदेश की पहली महिला डीजीपी बनने का सुनहरा मौका
24 October 2026 • 03:04 pm

मध्य प्रदेश पुलिस महकमे के मुखिया यानी पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य में नए डीजीपी के चयन के लिए केंद्र सरकार को 1991 से 1994 बैच के कुल 12 योग्य आईपीएस (IPS) अधिकारियों के नामों का पैनल भेजा जा चुका है। इस पूरी चयन प्रक्रिया के तहत 1991 बैच के तीन वरिष्ठ अधिकारी डीजी वरुण कपूर, डीजी उपेंद्र जैन और डीजी प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव इस रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में तीन अधिकारियों का फाइनल पैनल तय कर नए डीजीपी के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।
प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के पास इतिहास रचने का मौका
इस पूरी दौड़ में सबसे बड़ा और चर्चा का विषय बनीं 1991 बैच की आईपीएस अधिकारी और वर्तमान में डीजी होमगार्ड के पद पर सेवाएं दे रही प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव हैं। यदि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उनके नाम पर मुहर लगाते हैं, तो वह मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली महिला डीजीपी बनने का गौरव हासिल करेंगी। उनका रिटायरमेंट फरवरी 2028 में है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दो साल के अनिवार्य कार्यकाल के नियम के अनुसार, यदि वह इस पद पर नियुक्त होती हैं, तो नवंबर 2029 तक इस पद पर बनी रहेंगी। उनके संभावित कार्यकाल के दौरान उज्जैन सिंहस्थ, विधानसभा और लोकसभा जैसे बड़े चुनाव भी संपन्न होंगे।
वरुण कपूर और उपेंद्र जैन भी दौड़ में प्रमुख दावेदार
वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर चल रहे डीजी (जेल) वरुण कपूर भी इस रेस के प्रबल दावेदारों में शामिल हैं। उनका रिटायरमेंट मई 2027 में है, लेकिन डीजीपी बनने पर उनका कार्यकाल नवंबर 2028 तक का रहेगा, जिसमें उज्जैन सिंहस्थ और राज्य का अगला विधानसभा चुनाव शामिल होगा। वहीं, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के डीजी उपेंद्र जैन का लंबा प्रशासनिक और इन्वेस्टिगेशन का अनुभव उनके पक्ष में जाता है। उनका रिटायरमेंट अगस्त 2027 में है, और डीजीपी चुने जाने पर उनका कार्यकाल नवंबर 2029 तक रहेगा, जिससे उनके कार्यकाल में भी सिंहस्थ और दोनों बड़े चुनाव पड़ेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के नए और सख्त नियम
डीजीपी पद के चयन के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दो बहुत ही महत्वपूर्ण और नई शर्तें निर्धारित की गई हैं
6 महीने की सर्विस बाकी: यूपीएससी (UPSC) पैनल में केवल उन्हीं अधिकारियों के नाम शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी सामान्य सेवानिवृत्ति में कम से कम 6 महीने की सेवा शेष हो।
10 साल की कोर पुलिसिंग: सुप्रीम कोर्ट के ताजा स्पष्टीकरण के अनुसार, दावेदार अधिकारी के पास कानून-व्यवस्था, क्राइम ब्रांच/CID, EOW, इंटेलिजेंस, विजिलेंस या केंद्रीय जांच एजेंसियों में कुल मिलाकर कम से कम 10 साल का जमीनी पुलिसिंग अनुभव होना अनिवार्य है।
डीजीपी का कार्यकाल और हटाने के कड़े नियम
एक बार पदभार ग्रहण करने के बाद डीजीपी को निश्चित रूप से 2 साल का फिक्स कार्यकाल मिलता है। उन्हें केवल तीन अत्यंत असाधारण और विशेष परिस्थितियों में ही समय से पहले हटाया जा सकता है
ऑल इंडिया सर्विसेज (अनुशासन एवं अपील) नियमों के तहत कोई बड़ी दंडात्मक कार्रवाई होने पर।
किसी आपराधिक मामले या भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में अदालत से दोषसिद्ध होने पर
शारीरिक या मानसिक रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह असमर्थ होने पर।
देश के अन्य राज्यों में महिला डीजीपी का इतिहास
यदि प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव का चयन होता है, तो मध्य प्रदेश भी उन चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहाँ महिला अधिकारी ने पुलिस बल की कमान संभाली है। देश में सबसे पहले उत्तराखंड को यह गौरव मिला था, जब 2004 में कंचन चौधरी भट्टाचार्य देश की पहली महिला डीजीपी बनी थीं। इसके बाद 2010 में तमिलनाडु में लतिका सरन, 2017 में गुजरात व कर्नाटक तथा 2024 में रश्मी शुक्ला महाराष्ट्र की पहली महिला डीजीपी नियुक्त की गईं। अब सबकी निगाहें मध्य प्रदेश सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं।

